Sunday, 16 September 2018

आखिर कब तक बनती रहेंगी नन्ही जाने दुष्कर्म का शिकार?

कराहती हुई आवाज़ में एक बच्ची कहती है मां, मुझे ठीक कर दो, या मार डालो... माँ मुझे बचा लो या माँ मार दो,,
माँ मुझे नही जीना ऐसे संसार मे जहाँ मेरी कोई इज्ज़त नही...
ये शब्द उस 7 साल की मासूम बच्ची के है जो आज से 2 महीने पहले मध्यप्रदेश के मंदसौर में  दरन्दगी का शिकार बनी थी.. और दिल्ली के निर्भया हत्या कांड की यादें एक फिर पूरे देश ने देखी.. आखिर क्या कसूर था उस बच्ची का यही की वह एक 7 साल की मासूम लड़की है ।

ज़रा सोचिए.. एक बच्ची को दिल्ली की सड़को में दुष्कर्म कर उसके अंग अंग को काटकर मार दिया जाता है,  कठुआ में एक बच्ची को उसके ही रिश्तेदार दुष्कर्म कर मंदिर के पीछे मार देते है, मंदसौर में एक मासूम को चॉक्लेट बिस्कुट के बहाने स्कूल से ले जाकर ऐसे कतिपय लोग दुष्कर्म कर उस मासूम की आंते  तक बाहर निकाल देते है, इंदौर में एक 4 महीने की बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसे रोड में फेक दिया जाता है, सतना में एक 5 साल की बच्ची के साथ बलात्कार कर जंगल मे उसे छोड़ दिया जाता है। और इतना ही नही 17  शिक्षक  मिलके एक लड़की के साथ महीनों से दुष्कर्म करते आते है और वो लड़की किसी को बता नही पाती उसे इतना डराया धमकाया जाता है की शायद वह पहले ही मर चुकी होती है। और भी ऐसे कई मामले सामने आए जहाँ रिश्तेदार, बाप, चाचा तक ने दरन्दगी की हदे पर कर दी। जब ये बच्ची बड़ी होंगी आखिर क्या सोचेंगी, क्या इनकी इज्जत रह जायेगी, ये तो जीते जी ही मर चुकी है! बढ़ते दुष्कर्म अपराध पर आज एक माँ भी यही कहती ही कि नही चाहिए बेटी आखिर क्या करेगी दुनिया मे आके, और नही चाहिए ऐसा बेटा जो हैवान बने।

आज भी एक खबर पढ़ने के बाद खुद को रोक नही पाया लिखने से, मध्यप्रदेश के होशंगाबाद में 58 मूक-बधिर बलिकाओं  के साथ 15 साल से दुष्कर्म, छेड़छाड़ का मामला सामने आया। सोचने वाली बात यह है कि ये मामले आये दिन निकलर सामने आते है और रुकने की वजह बढ़ते ही जा रहे है। एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश दुष्कर्म के मामले में पहला और दूसरे स्थान में है। अब तो हाल ये है कि न्यूज़ पेपर पढो तो खबर आती है मासूम के साथ छेड़छाड़, रेप बस यही सब ज्यादा होता है।

फिर भी सवाल यही हैं कि आखिर मासूम, नन्ही जाने ही क्यों बनती है शिकार?  एक रिपोर्ट के मुताबिक मासूम बच्ची सॉफ्ट होती है जल्दी ही किसी की भी बातों में आ जाती है इसीलिए भी इनका शिकार ज्यादा होता है। एक तरफ बेटी बचाओ का नारा दूसरी तरफ बेटी से दुष्कर्म, हत्या जैसे अपराध।
'' ख़ून खौलता है ऐसे बर्बर कृत्य का सुनकर ही! एक बच्ची को देखकर किसी के मन में ऐसे ख़्याल भी कैसे आ सकते हैं! कोई ऐसी भी प्रक्रिया हो कि जितना जघन्य अपराध, उतनी ही ख़ौफ़नाक सज़ा' '! 

बस इतना ही कहूंगा सरकार फास्टट्रैक , पोक्सो एक्ट जैसे नियम कानून बना तो देती है पर क्या इसका कोई असर हो रहा है नही? न ही ऐसे अपराध कम हो रहे है?  ज़रूरत है इससे भी कठोर निर्णय की ताकि इन अपराधों को रोका जा सके।
जररूत है बर्बर बलात्कारीयों के ख़िलाफ़ तख़्तियाँ बराबर उठाने की।  जररूत है एक ऐसे कानून की जिसमे ऐसा सोचने पर भी रूह कांप ऊठे।🙏
- मेरी आंखों से

रोहित में कुछ बात ही अलग है..

क्रिकेट की जब भी बात आती है तो हमारे देश मे क्रिकेट को पूजा जाता है। लोगो की भावनायें इससे जुड़ी होती है। एक तरफ गुस्सा तो एक तरफ प्यार भी आ...